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*प्रयागराज में संगठित हिंसा का आरोप: MRF टायर शोरूम में कर्मचारियों से मारपीट, जातिगत अपमान और बंधक बनाए जाने का मामला*

प्रयागराज

*प्रयागराज में संगठित हिंसा का आरोप: MRF टायर शोरूम में कर्मचारियों से मारपीट, जातिगत अपमान और बंधक बनाए जाने का मामला*

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प्रयागराज स्थित एक MRF टायर शोरूम में 04 फरवरी 2026 को हुई हिंसक घटना को लेकर पीड़ित पक्ष ने समाज, प्रशासन, अधिवक्ता समुदाय और न्यायप्रिय नागरिकों से सार्वजनिक अपील की है। पीड़ितों का कहना है कि यह घटना केवल एक प्रतिष्ठान पर हमला नहीं, बल्कि संविधान, कानून व्यवस्था और सामाजिक न्याय पर सीधा प्रहार है।

पीड़ित पक्ष के अनुसार, दिनांक 04/02/2026 को लगभग 25–30 लोगों की संगठित भीड़ शोरूम में घुस आई और वहाँ मौजूद कर्मचारियों को बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा गया। इस दौरान कर्मचारियों के साथ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग, मानसिक उत्पीड़न और जान से मारने की धमकी भी दी गई। पीड़ितों का कहना है कि उनके कर्मचारी घंटों तक भय, असहायता और अपमान की स्थिति में फँसे रहे।

*पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएँ*

पीड़ित पक्ष का दावा है कि यह कोई एकल घटना नहीं है। कुछ दिन पहले इन्हीं आरोपित व्यक्तियों द्वारा एक अधिवक्ता के साथ भी मारपीट की गई थी, जिसका वीडियो साक्ष्य उपलब्ध बताया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, उसी दिन प्रयागराज के प्रसिद्ध स्पाइस बाइट (Spice Bite) होटल में भी मारपीट की घटना हुई, जहाँ आरोप है कि हमलावरों ने होटल का सीसीटीवी DVR भी अपने साथ ले लिया। यह घटनाएँ कथित रूप से यह दर्शाती हैं कि आरोपित लोग लगातार और निर्भीक होकर कानून को चुनौती दे रहे हैं।

*पीड़ित होने के बावजूद दर्ज हुआ मुकदमा*

सबसे चिंताजनक पहलू यह बताया गया है कि घटना के शिकार होने के बावजूद प्रशासन द्वारा उल्टा पीड़ित पक्ष पर ही मुकदमा दर्ज कर लिया गया। इससे कई गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं—

क्या अब पीड़ित होना ही अपराध बनता जा रहा है?

क्या संगठित अपराध के विरुद्ध सच बोलना जोखिमपूर्ण हो गया है?

अधिवक्ता समाज से विशेष अपील

पीड़ित पक्ष ने अपनी अपील में विशेष रूप से अधिवक्ता समुदाय से हस्तक्षेप की माँग की है। उनका कहना है कि अधिवक्ता संविधान के रक्षक और न्याय के प्रहरी होते हैं। जब अधिवक्ता, कर्मचारी और आम नागरिक स्वयं असुरक्षित महसूस करने लगें, तो न्याय की अवधारणा पर गंभीर संकट उत्पन्न हो जाता है।

पीड़ितों का स्पष्ट कहना है कि—

कर्मचारियों को संगठित भीड़ ने पीटा

एक व्यक्ति को बंधक बनाकर मारपीट की गई

जातिगत अपमान किया गया

और अब वही पीड़ित न्याय के लिए संघर्ष कर रहा है

इसके बावजूद, पीड़ित पक्ष ने यह भी कहा है कि उन्हें आज भी प्रशासन और अधिवक्ता समुदाय पर विश्वास है कि वे अन्याय के पक्ष में नहीं, बल्कि न्याय के साथ खड़े होंगे।

समाज, मीडिया और संस्थाओं से समर्थन की माँग

पीड़ित पक्ष ने समस्त नागरिकों, सामाजिक संगठनों, मीडिया और मानवाधिकार संस्थाओं से अपील की है कि—

इस मामले पर सार्वजनिक रूप से आवाज़ उठाई जाए

पीड़ितों के साथ खड़ा हुआ जाए

और यह सुनिश्चित किया जाए कि कानून का भय अपराधियों में हो, पीड़ितों में नहीं

पीड़ितों का कहना है कि न्याय केवल अदालतों तक सीमित नहीं होता, बल्कि समाज की सामूहिक चेतना से ही कानून व्यवस्था मजबूत होती है।

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