*75 हज़ार की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए दो अफसर प्रयागराज में फर्म–सोसाइटी कार्यालय का ‘गंदा खेल’ उजागर*
प्रयागराज
*75 हज़ार की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए दो अफसर प्रयागराज में फर्म–सोसाइटी कार्यालय का ‘गंदा खेल’ उजागर*

प्रयागराज शिक्षा संस्थानों के कार्यों में फैले भ्रष्टाचार की एक चौंकाने वाली तस्वीर प्रयागराज से सामने आई है। फर्म, सोसाइटी एवं चिट्स कार्यालय (मेहदौरी, तेलियारगंज) में तैनात एक लेखाकार–सहायक रजिस्ट्रार और एक कंप्यूटर ऑपरेटर को 75,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एसीबी) ने रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
शिकायत से कार्रवाई तक — एसीबी की सटीक योजना
फतेहपुर ज़िले के बिंदकी, महाजनी गली निवासी रतिपाल सिंह ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी कि ज्ञान भारती मूला देवी एमएस जूनियर हाई स्कूल समिति के नवीनीकरण के नाम पर अधिकारी ₹75,000 की रिश्वत मांग रहे हैं।
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए एसीबी ने 4 नवंबर 2025 को जाल बिछाने की रणनीति बनाई। 6 नवंबर की दोपहर 1:19 बजे एसीबी की टीम ने निरीक्षक अलाउद्दीन अंसारी के नेतृत्व में कार्यालय में दबिश दी और दोनों आरोपियों को रिश्वत की रकम लेते हुए पकड़ लिया। मौके से ₹75,000 नकद बरामद किए गए।
गिरफ्तार आरोपी
रागविराग त्रिपाठी, पुत्र स्व. गिरजाकांत त्रिपाठी
पता – 265 निराला निवास, बक्शी खुर्द, दारागंज, प्रयागराज
पद – लेखाकार एवं सहायक रजिस्ट्रार
विजय राज सिंह, पुत्र बनवारी लाल
निवासी – कुवाडीह, सराय इनायत, प्रयागराज
पद – संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर
दोनों को मौके पर हिरासत में लेकर शिवकुटी थाना भेजा गया, जहाँ आगे की विधिक कार्रवाई जारी है।
भ्रष्टाचार का मॉडल — पकड़ो तो पकड़ में आता!
यह मामला केवल रिश्वतखोरी का नहीं, बल्कि उस सड़े-गले सिस्टम का खुलासा है, जहाँ शिक्षा संस्थानों की फाइलें भी ‘पैसे की भाषा’ में आगे बढ़ती हैं।
समिति के नवीनीकरण जैसे पारदर्शी प्रक्रिया वाले काम को इन कर्मचारियों ने उगाही के धंधे में बदल दिया। सवाल उठता है कि क्या यह खेल केवल दो लोगों का था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय है?
ट्रैप टीम का गठन
भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम ने यह कार्रवाई बेहद सटीकता से अंजाम दी।
टीम प्रभारी: निरीक्षक अलाउद्दीन अंसारी
सदस्य: निरीक्षक रविन्द्र सिंह, निरीक्षक राकेश बहादुर सिंह, निरीक्षक अंजलि यादव, उप-निरीक्षक अर्जुन सिंह, हेड कांस्टेबल अनिरुद्ध कुमार बलवंत, कांस्टेबल वेद प्रकाश मिश्रा, लक्ष्मण यादव, बिजेंद्र कुमार, दीपक शुक्ला, विकास पांडे।
सवाल अब सिस्टम पर
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार कितनी गहराई तक फैला हुआ है।
अगर नियमन और सत्यापन करने वाला ही कार्यालय दलाली और सौदेबाजी का अड्डा बन जाए, तो शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लग जाता है।