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*मुजफ्फरनगर में बड़ा भू-माफिया घोटाला: SDM समेत सरकारी तंत्र पर गंभीर सवाल*

मुजफ्फरनगर जिले

*मुजफ्फरनगर में बड़ा भू-माफिया घोटाला: SDM समेत सरकारी तंत्र पर गंभीर सवाल*

मुजफ्फरनगर जिले

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से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे सरकारी तंत्र की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां जानसठ तहसील के एसडीएम जयेंद्र सिंह पर आरोप है कि उन्होंने 3 करोड़ रुपये की मोटी रिश्वत लेकर 750 बीघा सरकारी और सोसायटी की जमीन भूमाफिया के नाम कर दी।

यह जमीन नेशनल हाईवे के किनारे स्थित है, जिसकी कीमत करोड़ों में आँकी जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि हाई कोर्ट ने इस जमीन को पहले ही सरकारी संपत्ति घोषित किया था, लेकिन इसके बावजूद एसडीएम ने आदेश जारी कर भूमाफिया को जमीन सौंप दी।

*कैसे हुआ घोटाला?*

1962 में इस जमीन का पंजीकरण डेरावाल कोऑपरेटिव फार्मिंग सोसायटी के नाम पर हुआ था।

इसमें 600 बीघा सोसायटी की और 150 बीघा सरकारी जमीन शामिल है।

लंबे समय से विवादित रही इस जमीन को एसडीएम ने जुलाई 2025 में अचानक भूमाफिया अमृतपाल के नाम कर दिया।

यह ट्रांसफर एक अलग हो चुके सोसायटी सदस्य हरबंस के नाम पर दिखाकर किया गया।

*शिकायत और जांच*

कुछ ईमानदार सोसायटी सदस्यों ने जब इसकी शिकायत डीएम उमेश मिश्रा से की, तो तुरंत जांच समिति बनाई गई।

जांच रिपोर्ट में एसडीएम को दोषी पाया गया।

खुलासा होने पर एसडीएम ने रातों-रात आदेश वापस लेने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

*रिश्वतखोरी का खुलासा*

मुख्य आरोप: 3 करोड़ रुपये की रिश्वत लेकर जमीन सौंपना।

दूसरा आरोप: एक पूर्व विधायक के करीबी से 10 लाख रुपये रिश्वत लेना, हालांकि बाद में रकम लौटा दी गई थी।

*कार्रवाई और आगे की जांच*

सरकार ने एसडीएम जयेंद्र सिंह को तत्काल निलंबित कर राजस्व परिषद से अटैच कर दिया है।

आगे की जांच बरेली कमिश्नर आईएएस सौम्या अग्रवाल को सौंपी गई है।

डीएम ने साफ किया कि अब इस जमीन पर कोई पंजीकरण नहीं होगा।

विभागीय और कानूनी कार्रवाई की पूरी तैयारी की जा रही है।

👉 यह मामला सिर्फ एक अफसर का भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि इसने सरकारी कर्मचारियों की कार्यशैली पर भी कड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

 

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