बारिश में चौकीदार का कच्चा मकान भरभराकर गिरा, बाल-बाल बचा परिवार; आपदा राहत पर उठे गंभीर सवाल
कौशाम्बी

बारिश में चौकीदार का कच्चा मकान भरभराकर गिरा, बाल-बाल बचा परिवार; आपदा राहत पर उठे गंभीर सवाल
कौशाम्बी। नेवादा क्षेत्र के उमरवल गांव में बीती रात बारिश के दौरान चौकीदार उप जगन्नाथ से जुड़े परिवार का कच्चा मकान अचानक भरभराकर गिर गया। मकान गिरते ही तेज आवाज के साथ परिवार में चीख-पुकार मच गई। गनीमत रही कि समय रहते लोग किसी तरह बाहर निकल आए और बड़ा हादसा होने से टल गया।
बताया जा रहा है कि जगन्नाथ बुधराज के मकान में रहते थे। रात के अंधेरे में अचानक मकान गिरने से परिवार के लोगों में दहशत फैल गई। मकान के मलबे में घरेलू सामान दबकर खराब होने की बात भी सामने आई है।
हादसे के बाद मौके पर पहुंचे राजस्व विभाग के कर्मचारियों द्वारा कथित तौर पर यह कहा गया कि मकान में कोई नहीं रहता था और वहां सामान भी नहीं था। हालांकि, पीड़ित परिवार का कहना है कि वे इसी मकान में रहते थे और उनका घरेलू सामान भी मलबे में दबा है।
ग्रामीणों के बयान से भी उठे सवाल
गांव के कुछ लोगों से जानकारी लेने पर उन्होंने बताया कि इस मकान में बुधराज के माता-पिता रहते थे। ऐसे में मौके पर जांच के दौरान यदि मकान में रखा सामान हादसे के बाद बाहर निकाल लिया गया हो, तो केवल उस समय मकान खाली दिखने के आधार पर वहां किसी के न रहने का निष्कर्ष निकालना कितना उचित है, यह जांच का विषय है।
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में पहले से जर्जर कच्चे मकानों में रहने वाले गरीब परिवारों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन को गंभीरता दिखानी चाहिए। यदि रात के समय मकान गिरने से कोई व्यक्ति मलबे में दब जाता और उसकी जान चली जाती, तो आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी होती?
आपदा राहत की मांग, निष्पक्ष जांच की अपील
पीड़ित परिवार ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, मकान और गृहस्थी के सामान को हुए नुकसान का वास्तविक आकलन कराने तथा पात्रता के अनुसार आपदा राहत एवं आवासीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जर्जर मकानों में रहने वाले गरीब परिवारों की सुरक्षा के लिए हादसा होने का इंतजार किया जाएगा? अगर प्रशासन को पहले से ऐसे मकानों की जानकारी है तो समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने और राहत देने की व्यवस्था क्यों नहीं की जाती?
अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कर पीड़ित परिवार को नियमानुसार राहत दिलाता है या मामला केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाता है।


