*कौशांबी में जमीन घोटाले का आरोप: 1 बिस्वा की जगह 10 बिस्वा का फर्जी एग्रीमेंट, पीड़ित को जान से मारने की धमकी*
कौशाम्बी

*कौशांबी में जमीन घोटाले का आरोप: 1 बिस्वा की जगह 10 बिस्वा का फर्जी एग्रीमेंट, पीड़ित को जान से मारने की धमकी*
शिकायतों के बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, सवालों के घेरे में राजस्व विभाग
कौशांबी जिले के सराय अकिल थाना क्षेत्र अंतर्गत फकीराबाद कस्बे में संजीवनी हॉस्पिटल के पास स्थित भूमि मेंको लेकर एक गंभीर जमीन घोटाले का मामला सामने आया है। पीड़ित ने आरोप लगाया है कि भूमिधरी आराजी संख्या 123 में केवल 1 बिस्वा भूमि का एग्रीमेंट कराया गया था, लेकिन साजिश के तहत 10 बिस्वा भूमि का फर्जी एग्रीमेंट तैयार करा लिया गया।
पीड़ित के अनुसार, इस कथित धोखाधड़ी में मोनू नगरेहा, फरीद अहमद और मनोज केसरवानी शामिल हैं। आरोप है कि दस्तावेजों में जानबूझकर हेराफेरी कर भूमि का रकबा बढ़ा दिया गया। जब पीड़ित को इस फर्जीवाड़े की जानकारी हुई और उसने इसका विरोध किया, तो आरोपियों द्वारा उसे लगातार जान से मारने की धमकी दी जाने लगी।
धमकियों से दहशत में पीड़ित परिवार
पीड़ित का कहना है कि धमकियों के चलते वह और उसका परिवार भय के साए में जीवन जीने को मजबूर है। किसी अनहोनी की आशंका को लेकर परिवार में लगातार चिंता का माहौल बना हुआ है।
प्रशासन से की गई कई शिकायतें, लेकिन कार्रवाई शून्य
पीड़ित ने इस मामले को लेकर तहसील प्रशासन, राजस्व विभाग और स्थानीय अधिकारियों को कई बार लिखित शिकायतें दीं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। आरोप है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण आरोपियों के हौसले और बढ़ते जा रहे हैं।
पहले भी लग चुके हैं मुख्य आरोपी पर आरोप
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मुख्य आरोपी मोनू नगरेहा पर पहले भी लोगों की जमीन पर अवैध कब्जा करने और फर्जी दस्तावेज तैयार कराने जैसे गंभीर आरोप लग चुके हैं। हालांकि, कथित प्रभावशाली संरक्षण के चलते हर बार मामले को दबा दिया गया।
न्याय के लिए दर-दर भटक रहा पीड़ित
पीड़ित का कहना है कि वह न्याय की उम्मीद में लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहा है, लेकिन कहीं से भी उसे राहत नहीं मिल रही। अब उसने उच्च अधिकारियों और शासन स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की है।
इस पूरे मामले ने तहसील प्रशासन और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सवाल यह है कि आखिर अब तक आरोपियों पर कोई कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या प्रशासन किसी दबाव में है, या फिर पीड़ित को न्याय के लिए और इंतजार करना पड़ेगा?




