*सफदरजंग अस्पताल में हृदय पुनर्वास की नई गाइडलाइन-2026 जारी, व्यायाम और जीवनशैली बदलाव पर जोर*
नई दिल्ली
*सफदरजंग अस्पताल में हृदय पुनर्वास की नई गाइडलाइन-2026 जारी, व्यायाम और जीवनशैली बदलाव पर जोर*
भारतीय परिस्थितियों और उपलब्ध स्वास्थ्य संसाधनों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए दिशानिर्देश, हृदय रोगियों के दीर्घकालिक पुनर्वास और दोबारा बीमारी के जोखिम को कम करने पर फोकस
नई दिल्ली, 12 सितंबर। वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (वीएमएमसी) एवं सफदरजंग अस्पताल में शनिवार को ‘भारतीय संदर्भ में हृदय पुनर्वास के लिए मानक क्लीनिकल प्रैक्टिस गाइडलाइन-2026’ जारी की गई। भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था की जरूरतों, उपलब्ध संसाधनों और मरीजों की पहुंच को ध्यान में रखकर तैयार किए गए इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य हृदय रोगियों के पुनर्वास को अधिक व्यवस्थित, प्रभावी और प्रमाण आधारित बनाना है।
गाइडलाइन जारी करने के अवसर पर प्रख्यात वैज्ञानिक एवं जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. निर्मल कुमार गांगुली मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। वहीं डॉ. हर्ष वर्धन और डॉ. विजय मोहन कोहली विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता रानी शर्मा, गाइडलाइन विकास समिति के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार श्रीवास्तव और डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय की सलाहकार डॉ. ताशी तोबगे समेत कई वरिष्ठ चिकित्सक एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
हृदय रोग के बाद पुनर्वास को बताया जरूरी
विशेषज्ञों ने कहा कि हृदय रोग के उपचार के बाद मरीज की शारीरिक क्षमता को दोबारा बेहतर करने, जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाने और भविष्य में हृदय संबंधी जोखिम को कम करने के लिए व्यवस्थित हृदय पुनर्वास (कार्डियक रिहैबिलिटेशन) बेहद महत्वपूर्ण है।
विभागाध्यक्ष डॉ. अजय गुप्ता ने बताया कि हृदय पुनर्वास को केवल व्यायाम तक सीमित नहीं किया जा सकता। मरीज की कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए चिकित्सकों के साथ फिजियोथेरेपिस्ट, आहार विशेषज्ञ, मनोवैज्ञानिक और नर्सिंग स्टाफ सहित विभिन्न विशेषज्ञों की संयुक्त भूमिका जरूरी है।
मरीज की जरूरत के अनुसार होगा पुनर्वास
गाइडलाइन की प्रमुख विकासकर्ता डॉ. सुमन बधल ने बताया कि दिशानिर्देश तैयार करते समय देश में उपलब्ध स्वास्थ्य ढांचे, प्रशिक्षित मानवबल, मरीजों में जागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में मौजूद अंतर को विशेष रूप से ध्यान में रखा गया है।
नई गाइडलाइन में जोखिम आकलन, मरीज की क्षमता के अनुसार व्यायाम, संतुलित जीवनशैली, मानसिक स्वास्थ्य सहयोग और लंबे समय तक बीमारी से बचाव जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है।
बहु-विषयक टीम की भूमिका पर जोर
दिशानिर्देशों में हृदय रोग विशेषज्ञ के साथ पुनर्वास विशेषज्ञ, फिजियोथेरेपिस्ट, आहार विशेषज्ञ, मनोवैज्ञानिक और नर्सिंग कर्मियों के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण बताया गया है। इसका उद्देश्य मरीज को उपचार के बाद सामान्य जीवन में लौटने में मदद करना और भविष्य में हृदय रोग से जुड़े जोखिमों को कम करना है।
मुख्य अतिथि डॉ. निर्मल कुमार गांगुली ने देश में बढ़ते हृदय रोगों के बोझ के बीच सभी मरीजों तक सुलभ, व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण हृदय पुनर्वास सेवाएं पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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